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Friday, October 5, 2012

बाल साहित्य उपेक्षित क्यों ?


ये लेख इस्पातिका में एक पूर्वपीठिका के रूप में प्रकाशित हुआ है। देखिये पीठ कैसी होती है। इंतज़ार कीजिये। 

Sunday, September 30, 2012

ग़ज़ल और बाल साहित्य

ये दो गजलें और नीचे का एक लेख प्रभात खबर में आए थे। आज लगा ही तो दिया यहाँ पर । 


ज़ीस्त के दर्द से बेदार हुए

  ज़ीस्त के दर्द से बेदार हुए इस तरह हम भी समझदार हुए زیست کے درد سے بیدار ہوئے اس طرح ہم بھی سمجھدار ہوئے सच कहा तो कोई नहीं माना झूठ बोला ...