रूह में अपनी आ जाने दे
ख़ुद को मुझ पर छा जाने दे
तेरी नज़रें दरिया दरिया
कश्ती बन लहरा जाने दे
इश्क़, तसव्वुर सब अफ़साने
बस इक बार सुना जाने दे
मैं तुझको तो क्या समझूँगा
ख़ुद को अभी भुला जाने दे
चाहा था कहना कुछ तुमसे
समझा ना तूने , जाने दे ।
ज़ीस्त के दर्द से बेदार हुए इस तरह हम भी समझदार हुए زیست کے درد سے بیدار ہوئے اس طرح ہم بھی سمجھدار ہوئے सच कहा तो कोई नहीं माना झूठ बोला ...
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