Wednesday, August 24, 2016

Dated 2016/08/19 हिंदी कहानी सद्गति का नाट्य रूपांतरण

No comments:

Post a Comment

ज़ीस्त के दर्द से बेदार हुए

  ज़ीस्त के दर्द से बेदार हुए इस तरह हम भी समझदार हुए زیست کے درد سے بیدار ہوئے اس طرح ہم بھی سمجھدار ہوئے सच कहा तो कोई नहीं माना झूठ बोला ...